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Lost invention Sloot digital coding system हिन्दी में

आज कल हमारे फोन में कम space की समस्या बनी रहती है । और हमारे पास कितना भी महँगा फोन हो  एक समय बाद उसमे यह समस्या जरूर आती है कुछ समय बाद फोन की Memory full होने लगती है । आज के समय में लगभग सभी फोन मे 64 GB तक का Space होता है। और फिर हम Internet से Videos download करते है । अपने  फोन के केमरे से Photos और Videos record करते है।  और Play store से तरह तरह के Apps install करते है।  और ऐसे में हमारे फोन का  64 GB space कम लगने लगता है । और , फिर हमें अलग से Memory card लगाना पड़ता है अब जरा सोचिए ! अगर ऐसा होता कि हम एक फीचर फिल्म जिसका Size लगभग 1 GB से 2 GB तक होता है और उसे हम सिर्फ 8 KB में store कर के रख सकते तो सोचिए हमारे फोन का 64 GB space कितना काफी होता !  तो आइये आज इस Post में हम इसी Topic के बारे में बात करेगे। एक Lost invention Sloot digital coding system जिस से ऐसा होना संभव था या भविस्य में ऐसा हो सकता है

आज  हमारे पास कितनी भी  बड़ी Memory बाला फोन या लैपटाप हो  कुछ समय बाद हमें वही Memory कम  पड़ जाती है और  इस समस्या से बचने के लिए हमें अपने फोन में External memory यानी Memory card लगाना पड़ता है या फिर हमें एक Pen drive साथ में रखनी पड़ती है। जिसको संभालना भी एक ज़िम्मेदारी बन जाती है। और यही समस्या लैपटाप users के सामने भी आती है । लैपटाप पर काम करते करते हमारे पास इतना Data हो जाता है कि Laptop में लगी Hard Drive का space भी कम लगने  लगता है फिर  और अधिक Space के लिए हमें अलग से Hard drive लेनी पड़ती है । और कभी-कभी एसा होता है जब हम किसी को Email से कोई File Attach कर के भेजते है तो file का Size बड़ा होने पर, वह File Attach नही होती है।  ऐसे में हम Winzip, WinRaR, 7-Zip जैसे,  File compression Technique का use करते है । इस Technique से File compress कर के, हम कुछ हद तक अपनी File का size कम कर सकते है ।

Tips

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Lost invention Sloot digital coding system in Hindi:

चलिये अब बात करते है Jan sloot के बारे में, इनका पूरा नाम रोमके jan बर्नहार्ड स्लूट था।  यह एक Electrical Engineer थे। इनका जन्म 27 August 1945 नीदरलैंड के ग्रोनिंगन City में हुआ था jan sloot के पिता एक school में हैडमास्टर थे ।  jan sloot की Education के लिए उन्हें डच Technical school में Enrol किया गया पर  Military रेडियो स्टेशन पर काम करने की बजह है उन्होने स्कूल छोड़ दिया । Radio station पर उन्होंने अपनी नौकरी को पूरा किया और बाद में वह  Philips Electronic में काम करने लगे । फिर एक- डेढ़ साल काम करने के बाद 1978 उन्होंने उन्होने यह Job छोड़ दी । और अगली job उन्होने ग्रोनिंगन City में एक Audio और Video store पर किया । कुछ साल बाद वह Nieuwegein  city चले गए और यहाँ उन्होने अपनी Televisions and Stereos Repairingकी Company start की । सन 1984 में jan sloot ने Computer   technology पर ध्यान देना शुरू किया जैसे कि उस समय जो Computer चला करते थे । जैसे  Philips P2000, कोमोडोर  64, IBM PC XT, और AT । और उन्होने एक Idea को जन्म दिया और उन्होने रेपाबेस नाम से देश भर में Repairing service का एक  नेटवर्क बनाया जो उस समय के सारे computers और parts कि मरम्मत किया करते थे ।

1995 में Sloot ने दावा किया कि उन्होने एक Encoding technique को विकसित किया है जो एक पूरी फीचर फिल्म को सिर्फ 8 KB में store कर सकता था अगर एक Low quality Video  के Size के बारे में बात करें तो वह करीब 80 MB  तक हो सकती है और एक  High Quality movie  का Size  लगभग 1 से 2 GB तक हो सकता है । 

इसके बाद उन्होने कई  बड़ी-बड़ी Companies को अपने इस Project को दिखाया उन्होने एक 64 KB की Memory Chip में 8 Movies को एक के बाद एक चला कर दिखाया था । और इस Technique का नाम उन्होने Sloot digital coding system दिया । उनके इस Invention को खरीदने के लिए कई Companies से offer मिले पर अंत में Philips company के साथ उनकी Deal Final हो गई । पर दुर्भाग्य वश Philips company के साथ Contract sign करने से एक दिन पहले Jan sloot की Heart attack से मौत हो गई और जिस फ्लॉपी Disk में उन्होने अपने Invention का Source code रखा था वह फ्लॉपी Disk भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गई । और वह Source Code Philips company को कभी नहीं मिल सका और यह Invention दुनिया के सामने नहीं आ सका । इस लिए इसे Lost invention की Categorie में रखा गया । अब जरा सोचिए Jan sloot ने एक पूरी Movie को सिर्फ 8 Kb में Compress कर के store किया था अगर तुलना करें तो एक low quality Image का size 8 KB से ज्यादा होता है । इसका मतलब है कि अगर यह Lost invention दुनिया के सामने आ जाता तो हम एक Hollywood movie को एक Image के size के बराबर space में store कर के रख सकते थे अब आप कल्पना कर सकते है कि 64 GB memory बाले Smart Phone में हम कितनी Movies रख सकते थे कितना Data store कर सकते थे  और यह Space हमारे लिए  कितना होता ।

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Philips के पूर्व CTO और बोर्ड सदस्य रॉयल पीपर ने कहा था कि Sloot digital coding system कोई file Compression technique नहीं थी इसके सिधान्त कि तुलना हम Adobe postscript से कर सकते है । जहां Sender और Receiver जानता है कि किस तरह के डेटा को बदला जा सकता है । यह समझने में थोड़ा सा कठिन है पर यह  Adobe postscript एक Programming language से संभव हो सकता है ।  रॉयल पीपर का कहना है कि Sloot coding system में जो फिल्म jan sloot ने चला कर दिखाई थी वह पहले से Computer में टुकड़ों के रूप में हो सकती है । और एक Key तय करती है कि  उन टूटे हुये टुकड़ों को सही ढंग से व्यवस्थित कैसे करना है और टूटे हुए टुकड़ों से एक movie का पुनर्निर्माण कैसे करना है ।

पर यह कुछ भी हो यहाँ अलग-अलग तर्क लगाए जा सकते है । पर अभी तक Lost invention sloot digital coding system जैसी कोई भी Technology अभी तक दुबारा नहीं बनाई जा सकी है । अगर यह Technology दुनिया के सामने आ जाती तो हमारे सामने कम Space कि समस्या कभी नहीं आती ।

मुझे पूरी आशा है कि आप लोगों को Lost invention Sloot digital coding system क्या है इसके बारे में समझ आ गया होगा । अगर आपको यह Post अच्छी लगी तो आप सभी से गुजारिश है कि आप लोग इस जानकारी को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, के साथ share करें , जिससे कि हमारे बीच जागरूकता होगी और ज्ञान बढ़ेगा। अगर आप लोगों को किसी भी तरह का Doubt है तो आप मुझे बेझिजक comment कर के पूछ सकते है । में पूरी कोशिश करूंगा कि आपके सवाल का जवाब दे सकूँ । और इस post को पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद ।  

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