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🛰️ Satellite in Hindi | सैटेलाइट क्या है?

आपने कभी ना कभी सैटेलाइट 🛰️ के बारे में तो सुना ही होगा पर क्या आप जानते है कि सैटेलाइट क्या होता है। और यह कैसे काम करती है। आपको पता है  हम अपने दैनिक जीवन में सैटेलाइट का उपयोग हम कहाँ कहाँ करते है, आपका TV सैटेलाइट से चलता है, फ़ोन सैटेलाइट से कनेक्ट है, GPS से रास्ते देखना सैटेलाइट के और भी कई काम होते है तो आज इस पोस्ट में हम सैटेलाइट क्या है (what is satellite in hindi) और यह कैसे काम करता है। 

सैटेलाइट क्या है (What is Satellite in Hindi)

satellite hindi आसान भाषा में समझते है सैटेलाइट एक छोटा ऑब्जेक्ट जो अपने से कहीं बड़े ऑब्जेक्ट के चारों तरफ अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा है। satellite कहलाता है इसे Hindi में उपग्रह बोला जाता है। चंद्रमा हमारी पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है इस लिए चंद्रमा एक उपग्रह या सैटेलाइट है। लेकिन यह एक प्राकृतिक सैटेलाइट या उपग्रह है जसे इंसानो ने नहीं बनाया है।लेकिन इसी से प्रेरणा लेकर इंसान ने अपना ख़ुद का सैटेलाइट बना कर पृथ्वी की कक्षा में छोड़ दिए जिसे हम कृत्रिम सैटेलाइट कहते है जो हम इंसान के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं आपको बता दें मानव द्वारा निर्मित कृत्रिम सैटेलाइट एक छोटे से टीवी के आकार से लेकर 1 बड़े ट्रक के बराबर भी हो सकती है यह इसकी साइज़ इनके काम पर निर्भर करती है

हमारे सौरमंडल में सैकड़ों प्राकृतिक उपग्रह है जो किसी न किसी ग्रह की परिक्रमा करते रहते है और हज़ारों की संख्या में कृत्रिम उपग्रह है जो पृथ्वी की परिक्रमा करते रहते है इनमें से हर सैटेलाइट का काम अलग-अलग होता है इनमें से कुछ मौसम के बारे में जानकारी हासिल करते के लिए है, कुछ पृथ्वी की फ़ोटो लेने के लिए होती है और कुछ कम्यूनिकेशन के लिए होती है जो TV signals, Phone Calls आदि काम करने के लिए होती है।आज के समय में लगभग 4900 Satellites है जो पृथ्वी की परिक्रमा कर रही है। 

Satellite कैसे काम करता है।

एक सैटेलाइट को इस तरह से बनाया जाता है कि वह पृथ्वी की कक्षा से बाहर अत्यधिक तापमान, रेडिएशन का सामना कर सके, तथा यह भी ध्यान रखा जाता है कि इसका वज़न ज़्यादा नहीं होना चाहिए क्यूँकि भारी वज़न होने के कारण इसके लॉंचिंग का ख़र्च बढ़ जाता है। इन सभी समस्या से बचने के लिए एक सैटेलाइट हल्के और मज़बूत धातु से बना हुआ होता है। अंतरिक्ष के बाहर सैटेलाइट की मरम्मत करना सम्भव नहीं होता है इस लिए इसलिए लॉंच करने से पहले इसके कमियों पर बारीकी के काम किया जाता है। 

एक सैटेलाइट के बीच में ट्रांसमीटर और रिसीवर लगे होते हैं जो सिग्नल को रिसीव या भेजने का काम करते हैं इसके अलावा कुछ कंट्रोल मोटर भी होती है जिनकी मदद से हम सैटेलाइट को रिमोट कंट्रोल कर सकते हैं इनकी स्थिति को चेंज करना हो या फिर एंगल चेंज करना हो सब इन कंट्रोल मोटर के जरिए कर सकते हैं इसके अलावा सैटेलाइट किस काम के लिए बनाया गया है वह ऑब्जेक्ट आपको सैटेलाइट में देखने को मिल जाता जैसे उपग्रह को पृथ्वी की इमेज लेने के लिए बनाया गया तो सैटेलाइट में बड़े कैमरे लगे होते है या फिर स्कैनिंग के लिए बनाया गया तो इसमें scanner देखने को मिल जायेंगे। यह सब सैटेलाइट के कार्य पर निर्भर करता है। मुख्यतर सैटेलाइट को हम कम्युनिकेशन के लिए काम में लेते है।

चलिए अब बात करते है कि एक कम्युनिकेशन सैटेलाइट कैसे काम करती है और उसमें क्या-क्या कम्पोनेंट्स का इस्तेमाल किया जाता है। 

कम्युनिकेशन सैटेलाइट के सेंटर में ट्रांसपोंडर्स होता है, ट्रांसपोंडर का मुख्य काम रिसीव सिग्नल की फ्रीक्वेंसी को बदलना किसी भी सिग्नल नॉइस को हटाना और सिग्नल की शक्ति को बढ़ाना होता है सैटेलाइट्स पर ट्रांसपोंडर 14 गीगा हर्ट से 12 गीगा हर्ट से में कन्वर्ट होता है और एक सैटेलाइट में 20 या 20 से अधिक ट्रांसपोंडर हो सकते हैं यह साफ है कि इन सभी फंक्शंस को संभालने के लिए लिए ट्रांसपोंडर को बहुत ज्यादा इलेक्ट्रिकल पावर की जरूरत होती है Power supply के लिए एक सैटेलाइट में बैटरी और सैटेलाइट के दोनों तरफ सोलर पैनल लगे होते हैं जिन से उनको ऊर्जा यानी कि बिजली मिलती रहती है  सोलर पैनल का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट को पावर देने के लिए किया जाता है सैटेलाइट पर Sun Sensor लगा होता है यह सेंसर सोलर पैनल को सही दिशा में एंगल देने में मदद करता है ताकि सूरज से ज्यादा पावर निकाली जा सके

सैटेलाइट में एंटीना को फ़िक्स किया जाता है जिनमें से सबसे आम एंटीना रिफ्लेक्टर एंटीना होता है। जिसका काम सिग्नल को भेजने और रिसीव करने के लिए किया जाता है। एक सैटेलाइट को अपनी ऑर्बिट को फ़ॉलो करने के लिए बनाया जाता है पर एक सैटेलाइट के चारों ओर की ग्रेविटेशनल फील्ड, चंद्रमा और सूरज की उपस्थिति के कारण एक समान नहीं रहती है इस वजह से कभी कभी सैटेलाइट अपने ऑर्बिट से डिस्प्लेस हो जाती है और फिर यह अपना काम सही से नहीं कर पाएगा। इस समस्या से बचने के लिए सैटेलाइट में Thrust का उसका इस्तेमाल किया जाता है जिस से उसको Fire किया जाता है और सैटेलाइट को सही पोजीशन में रखा जाता है Thrust के लिए आवश्यक फ्यूल को सैटेलाइट बॉडी की टैंक  में रखा जाता है सैटेलाइट की पोजीशन और थ्रस्ट के कंट्रोल को लगातार Earth स्टेशन से मॉनिटर किया जाता है पोजीशन कंट्रोल्स के अलावा अर्थ स्टेशन सैटेलाइट की हेल्थ और स्पीड पर भी नजर रखता है यह ट्रैकिंग टेलिमेटरी और कंट्रोल सिस्टम्स के माध्यम से किया जाता है यह सिस्टम से लगातार अर्थ रेशन को सिग्नल भेजते हैं और अर्थ और सैटेलाइट के बीच कनेक्शन बनाए रखते हैं आमतौर पर इन सिगनल्स को अन्य कम्युनिकेशन सिग्नल से अलग करने के लिए डिफरेंट फ्रिकवेंसीज पर एक्सचेंज किया जाता है क्या आपने कभी सोचा है कि एक सैटेलाइट का क्या होता है जब उसकी लाइफ़ ख़त्म हो जाती है उसका लाइफ स्पैन समाप्ति के करीब होता है यह सैटेलाइट दूसरे ऑपरेशन सैटेलाइट स्पेसक्राफ्ट को नुकसान पहुंचा सकते हैं इससे निपटने के लिए इन सैटेलाइट को थ्रस्ट ऐक्टिव करके Graveyard (कब्रस्तान) orbit तक पहुंचाया जाता है 

अब तक हमने एक कम्यूनिकेशन सैटेलाइट के बारे में बात की थी पर एक GPS Satellites के लिए सबसे महत्वपूर्ण कम्पोनेंट्स एक Atomic Clock और एक Antenna होता है, इस GPS Satellites में L Band Antenna का इस्तेमाल किया जाता है। 

अगर आपने कभी TV या Image में एक Satellite को देखा होगा तो आपने देखा होगा की वह Gold Color Foil से ढके हुए होते है इस Foil का क्या काम होता है। पर वास्तव में यह Foil नहीं है यदि आप इसका एक सेक्शन लेते हैं देखेंगे कि इसमें मल्टी लेयर स्ट्रक्चर होते है सैटेलाइट्स का स्पेस में तापमान में भारी वेरिएशन होता है जहां का तापमान -150 से 200 डिग्री सेल्सियस तक बदलता रहता है इसके अलावा सैटेलाइट Sun से हैवी सोलर रेडिएशन का सामना करते हैं यह मटीरियल वास्तव में एक ढाल के रूप में काम करता है जो सैटेलाइट कंपोनेंट्स को हैवी टेंपरेचर वेरिएशंस और सोलर रेडिएशन से बचाता है 

सैटेलाइट ऊपर कैसे टिके रहते है

यह तो आप जान गए होंगे कि satellite hindi क्या है लेकिन यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि सैटेलाइटलाइ ऊपर हवा में कैसे टिका रहता है और यह धरती पर गिरता क्यूँ नहीं है।तो इसका जवाब यह है कि अगर किसी चीज को अंतरिक्ष में रहना है तो उसे अपनी गति से किसी बड़े ऑब्जेक्ट का चक्कर लगाते रहना होगा इन की स्पीड पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को अपने ऊपर हावी नहीं होने देती। इस नियम के चलते सारे उपग्रह हवा में ऊपर टिके रहते हैं 

सैटेलाइट कैटेगरी

सैटेलाइट तीन कैटेगरी में बांटे गए है।

लो अर्थ आर्बिट सैटलाइट (Low Earth Orbit)

यह पृथ्वी की कक्षा की काफी पास होते हैं  इसकी ऊँचाई 160 से 1600 किलोमीटर तक होती है यह काफी तेज गति से पृथ्वी के चक्कर लगाते हैं इसलिए दिन में कई बार पृथ्वी के चक्कर पूरा करता है ऐसे में इन्हें पृथ्वी को स्कैन करने में बहुत कम समय लगता है इनका ज़्यादातर उपयोग Image और स्कैनिंग के लिए किया जाता है

मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट (Midum Earth Orbit)

यह वह सैटेलाइट होते जिनकी स्पीड न तो स्लो होती है और ना ही यह तेज़।यह करीब 12 घंटे में धरती का एक  चक्कर पूरा करता है यह उपग्रह किसी जगह से एक निश्चित समय से गुजरता है इनकी ऊंचाई 10000 किलोमीटर से 20000 किलोमीटर तक होती है इनका उपयोग navigation के लिए किया जाता है। 

हाई अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट (High Earth Orbit Satellite)

यह वो उपग्रह होते हैं जो धरती से बहुत दूर यानी 36000 किलोमीटर की दूरी पर होते हैं यह उपग्रह पृथ्वी की स्पीड के साथ पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं यानी यह उपग्रह आपके ऊपर है तो वह हमेशा आपके ऊपर रहेगा। इन उपग्रह का उपयोग कम्यूनिकेशन के लिए किया जाता है। 

भारत के सैटेलाइट

भारत ने अपना पहला सैटेलाइट 19 April 1975 में लॉंच किया था जिसका नाम आर्यभट्ट (Aryabhata) था और तब से लेकर अब तक भारत लगभग 135 सैटेलाइट्स अंतरक्षित में भेज चुका है आप इस लिंक पर क्लिक कर के भारत की सभी Satellite List देख सकते है।

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निस्कर्ष 

दोस्तों आज की इस पोस्ट से हमने What is Satellite in hindi में जाना कि सैटेलाइट क्या होती है सैटेलाइट एक मानव निर्मित कृत्रिम उपग्रह होता है जो Earth के चारों ओर चक्कर लगाता है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी तो इसे अपने दोस्तों के साथ shere कीजिए। 

lalit kushwaha
lalit kushwaha

Hello दोस्तों मेरा नाम ललित कुशवाह है में इस ब्लॉग का Admin और Author हूँ मुझे टेक्नॉलजी के बारे में पढ़ना और दूसरे लोगों को उसके बारे में बताना अच्छा लगता है इसलिए में इस ब्लॉग के माध्यम से आप सब लोगों को टेक्नॉलजी से सम्बंधित जानकारी हिंदी भाषा में देता हूँ। मुझे उम्मीद है की आप मुझे सपोर्ट करेंगे।

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